DAILY MURLI POINT
⭕DATE/01-11-2023
संन्यास भी दो प्रकार के हैं। संन्यास अर्थात् पवित्र रहना, 5 विकारों को छोड़ना
परमपिता परमात्मा के बच्चों से तो माया की एकदम लड़ाई होती है। बाप कहते हैं - यह हमारे बच्चे हैं, हम इन्हों को स्वर्ग में ले जाता हूँ। माया कहती है - नहीं, यह हमारे बच्चे हैं, हम इनको नर्क में ले जाती हूँ।
तुम जानते हो हम बरोबर ब्रह्मा के बच्चे हैं। शिवबाबा से नॉलेज ले रहे हैं। हम बाप से पवित्रता, सुख, शान्ति, हेल्थ, वेल्थ लेने आये हैं। भारत में हम ही सदा सुखी थे। अभी नहीं हैं। फिर बाप वह वर्सा दे रहे हैं। बच्चे जानते हैं फर्स्ट है पवित्रता।
रात को ही विचार सागर मंथन हो सकता है। ऐसे विचार सागर मंथन करते-करते बाप जैसा बनते जायेंगे।
बाप कहते हैं नारी ही स्वर्ग का द्वार है। माताओं पर कलष रखता हूँ। तो पहले-पहले समझाओ शिवाए नम:, भगवानुवाच। आवाज बुलन्द निकलना चाहिए।
धर्म में स्थित हो कर्म करने वाले ही धर्मात्मा हैं।
⭕DATE/02-11-2023
बाप का फ़रमान है - एक तो मुझ बाप को याद करो, दूसरा नॉलेज को धारण करो।
श्रीमत पर पूरा अटेन्शन देंगे तो ऊंच पद पायेंगे। रहमदिल बनना है, सबको रास्ता बताना है, कल्याण करना है।
राज़युक्त, युक्तियुक्त, योगयुक्त भव
सच्चाई की शक्ति से समय प्रमाण उनका दिमाग युक्तियुक्त, यथार्थ कार्य स्वत: ही करता है।
#⭕18/12/2024
पतित-पावन बाप की श्रीमत बिगर कोई पतित से पावन बन नहीं सकते। भक्ति है उतरती कला का मार्ग।
निश्चयबुद्धि बन फुल मार्क्स लेनी हैं।
आप सब अपनी स्वस्थिति अच्छे से अच्छी बनाने के लिए ही ब्राह्मण बने हो। ब्राह्मण जीवन में श्रेष्ठ स्थिति ही आपकी प्रापर्टी है
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बाबा ने समझाया है जब तुम बाप की गोद में आयेंगे तो यह विकारों की बीमारी और ही ज़ोर से बाहर निकलेगी। वैद्य लोग भी कहते हैं - बीमारी उथल खायेगी। बाप भी कहते हैं तुम बच्चे बनेंगे तो देह-अभिमान की और काम-क्रोध आदि की बीमारी बढ़ेगी। नहीं तो परीक्षा कैसे हो? कहाँ भी मूँझो तो पूछते रहो। जब तुम रूसतम बनते हो तब माया खूब पछाड़ती है। तुम बॉक्सिंग में हो। बच्चा नहीं बने हैं तो बॉक्सिंग की बात ही नहीं। वो तो अपने ही संकल्पों-विकल्पों में गोते खाते हैं, न कोई मदद ही मिलती है। बाबा समझते हैं - मम्मा-बाबा कहते हैं तो बाप का बच्चा बनना पड़े, फिर वह दिल में पक्का हो जाता है कि यह हमारा रूहानी बाप है। बाकी यह युद्ध का मैदान है, इसमें डरना नहीं है कि पता नहीं तूफान में ठहर सकेंगे वा नहीं? इसको कमजोर कहा जाता है। इसमें शेर बनना पड़े। पुरूषार्थ के लिए अच्छी मत लेनी चाहिए। बाप से पूछना चाहिए। बहुत बच्चे अपनी अवस्था लिखकर भेजते हैं। बाप को ही सर्टिफिकेट देना है। इनसे भल छिपायें परन्तु शिवबाबा से तो छिप न सके। बहुत हैं जो छिपाते हैं परन्तु उनसे कुछ भी छिप नहीं सकता। अच्छे का फल अच्छा, बुरे का फल बुरा होता है। सतयुग-त्रेता में तो सब अच्छा ही अच्छा होता है। अच्छा-बुरा, पाप-पुण्य यहाँ होता है।
ऐसा नहीं, पुरूषार्थ कर रहा हूँ - निश्चय बुद्धि होने के लिए। निश्चय तो एक ही होता है, उसमें परसेन्टेज़ नहीं होती। बाप एक है, उनसे वर्सा मिलता है। यहाँ हज़ारों पढ़ते हैं फिर भी कहें निश्चय कैसे करुँ? उनको कमबख्त कहा जाता है। बख्तावर वह जो बाप को पहचान और मान ले।
वरदान:-ब्रह्मा बाप समान जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करने वाले कर्म के बन्धनों से मुक्त भव
ब्रह्मा बाप कर्म करते भी कर्मो के बंधन में नहीं फंसे। सम्बन्ध निभाते भी सम्बन्धों के बंधन में नहीं बंधे। वे धन और साधनों के बंधन से भी मुक्त रहे, जिम्मेवारियां सम्भालते हुए भी जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव किया। ऐसे फालो फादर करो। किसी भी पिछले हिसाब-किताब के बंधन में बंधना नहीं। संस्कार, स्वभाव, प्रभाव और दबाव के बंधन में भी नहीं आना तब कहेंगे कर्मबंधन मुक्त, जीवनमुक्त।
स्लोगन:-तमोगुणी वायुमण्डल में स्वयं को सेफ रखना है तो साक्षी होकर खेल देखने का अभ्यास करो।
⭕ Date: 21/12/2024
सच्ची कमाई करने का पुरुषार्थ पहले स्वयं करो फिर अपने मित्र-सम्बन्धियों को भी कराओ चैरिटी बिगेन्स एट होम''
पवित्रता। जहाँ पवित्रता है वहाँ सुख-चैन है।
चैन अथवा सुख सभी मनुष्य चाहते हैं। परन्तु सुख और शान्ति के पहले तो चाहिए पवित्रता।
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