*#/* *रेशमी बालों वाली*/#**
हम सभी अपने जीवन की शुरुआत कुछ सीमित लोगों के साथ करते है.. और फिर जैसे जैसे हम बड़े होते जाते है वैसे- वैसे स्नेह की डोर द्वारा नए-नए लोग हमारे जीवन से जुड़ते जाते है।।
अक्सर ऐसा होता है कि पहले हम लोगों से मिलते है और उनके साथ कुछ समय गुजारने के क्रम में उनसे स्नेह हो जाती हैऔर फिर, वो एक विशेष पहचान के रिश्ते में हमारे साथ जीवन का हिस्सा बन जाते है।।
जैसे कि दोस्ती का रिश्ता....
पर कई बार ऐसा होता है कि लोगों की सुंदरता , उनकी बोली, उनकी चलन, उनके बेव्हार हमें स्नेहिल कर देती है और फिर हम उनके साथ स्नेह की डोर से जुड़ जाते हैैं।।
परन्तु इस जुड़ाव,, इस स्नेह, इस संबंध की कोई विशेष पहचान नहीं होती।।
मेरी इस कविता में भी कुछ इसी तरह के संबंध की सुंदरता समाई हुई है।। जैसे
हालांकि उनकी सुंदरता का वर्णन करने की शक्ति मेरे सब्दो में नहीं है फिर भी.......................
सोचा है मैंने एक सुंदरता को,
आज शब्दों में साजा जाए.....
दिल में मेरे जो छवि है उनकी,
उसे आज पन्नों पे छापा जाए।।
प्रभात किरण की रक्ताभ लरियों सी,
चमकती है उनके चेहरे की लाली।
शशि समान शीतलता चलन में,
बड़ी खूबसूरत है वह,
रेशमी बालों वाली.....
जब भी देखो उनकी अधरों पर,
मिलती मंद-मंद मुस्कान।
स्नेह बरसाते उनके नयनों की,
है अपनी अलग पहचान।।
बाते होती उनकी,
कानो में मिश्री घुलाने वाली।
सच में,
बड़ी खूबसूरत है वह,
रेशमी बालों वाली।।
कोमल होती डोर स्नेह की,
पर शक्ति उसमे बड़ी अपार।
देखो चांद का स्नेह कैसे,
ला देता शांत सागर में भी ज्वार।।
बनकर सांसें उनकी स्नेह है आती
मेरी धड़कन को धड़काने वाली,
फिर कहता हूं....
बड़ी खूबसूरत है वह,
रेशमी बालों वाली।।
✍️✍️
Abhijeet singh.....
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