समर्पण
मेरा यह मानना है कि कृतज्ञता कोई प्रवृति या रवैया नही है..आपको अपने जीवन में जो कुछ भी प्राप्त हुआ है उसके एहसास में जब आप अभिभूत हो जाते है, तब आपके अंदर से जो फूट परता है उसे कृतज्ञता कहते हैं!!
एक अच्छे शिक्षक का हमारे जीवन को सफ़ल बनाने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका है, कितना अहम योगदान है इसका एहसास केवल दो तरह के लोगों को सबसे बेहतर होता है–एक जिसने अपनें जीवन में उच्चतम शिक्षा हासिल की हो और दूसरा जिसने कोई शिक्षा हासिल ना की हो।
हां लेकिन इन दोनों तरह के एहसासों में जमीन आसमान का फर्क होता है– एक कीर्त्यज्ञता, समर्पणता और स्नेह से परिपूर्ण तो दूसरा दुःख, अफ़सोस और पाश्चताप से!!
शिक्षकों से हुए प्राप्ति के प्रति कृतज्ञ होने से हमारे जीवन में एक नई ऊर्जा का संचार होता है, जीवन को एक नया आयाम मिलता है।
मैंने अपने जीवन में अपने शिक्षकों से जो सीखा है उसका वर्णन शब्दों में कर पाना इतना आसन नही है या यूं कहे तो इस प्राप्ति का वर्णन कितना भी किया जाए कम ही होगा!!
फिर भी मैंने कीर्त्यज्ञता भरे इन एहसासों को शब्दों में कुछ इस तरह सजाया है कि,
तस्वीर सज रही तक़दीर की मेरी
मन विश्वास से खिला - ख़िला
छट रहा तिमिर सब मन का
ज्ञान कि ज्योत जो आपसे मिला!!
आश, विश्वास, बल, भरोसा..
समाया सांसों के हर तार में।
भरा हुआ है ओज सपनो में..
इतना आशीष जो आपसे मिला।।
चाल,चलन, भाषा, बोली।
वरदान प्यार का मिला आपसे जीवन में!
बढ़ते जा रहे कदम फलक की ओर
लिए अरमान एक हीं मन में।।
है एक अरमान कर दू।
आपको सारा जीवन अर्पण
दिखने लगे आप मुझमें
बन जाऊं मै कुछ ऐसा दर्पण।।
बन जाऊं मै कुछ ऐसा दर्पण।।
✍️✍️
Abhijeet kumar
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