तुम मेरे अपने हो...
कल रात सोने से पहले...
मैने सोचा था कुछ, आज के बारे में.....
आज कुछ पल तुम्हारे साथ बैठूंगा..
जीवन के शास्वत सिद्धांत से जुड़ी कुछ बातें करूंगा...
कहूंगा, अपने मन की सारी व्यथा तुम से...
कि, जब भी मन होता परेशान हो...
जीवन की राहें, ना दिखती आसान हो...
तुम हो या कि नहीं मेरे...
जब –जब ये बात मुझे सताती है...
तो धड़कन क्यू थम जाती है...?
जीवन तो चलता रहता है,
पर सांसें क्यू रूक जाती हैं!!..??
पर, कल रात सोने के बाद...
मैने देखा एक सपना!वो सपना, सपना ही नही था केवल..लगा ऐसे जैसे..खुले आसमान में एक सितारा टिमटिमा रहा हो..जैसे कि वो मेरे जीवन की भाग्य रेखा जगा रहा हो...जानता हूं, पर समझता नहीं कि,सपना तो आखिर सपना है –हकीकत नहीं...पर वो सपना, हकीकत से भी ऊपर हैकि जिससे कि जीवन धन्य हो जाए..कि जिसमे आपके सब ख़्वाब पूरे हो जाए...नहीं चाहिए अब जीवन से कुछ और..कि जब मेरे हिस्से में ऐसे सुंदर सपने हो..और ना ही अब कोई हकीकत भी..कि जब सपने में तुम मेरे अपने हो...कि जब सपने में तुम मेरे अपने हो...ये जीवन तुम्हारा✍️ ✍️ अभिजीत सिंह .........
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